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।। जय बाबा सिद्ध ।।

बाबा सिद्ध मंदिर, सोना अर्जुनपुर


Baba Siddh Temple
सहारनपुर-शामली-दिल्ली सिंगल रेलवे-लाइन पर रामपुर मनिहारान से अगला रेलवे स्टेशन है सोना अर्जुनपुर। रेलमार्ग के निकट और सड़क मार्ग (NH-709B / SH-57) से 2 किमी की दूरी पर बसे इस गांव की पहचान यहां के श्री बाबा सिद्ध मंदिर से होती है। गांव के बाहर रेलवे स्टेशन के पास ही कईं बीघा क्षेत्रफल में बने इस मंदिर के प्रति उत्तरी-भारत में खास श्रद्धा है।

मन्दिर के पीछे की कहानी बहुत प्राचीन है, जब यहां रहने के लिए एक संत कहीं से आए थे। संत का नाम और पता तो कोई नहीं जानता लेकिन उन्होंने यहां आते ही ऐसा धार्मिक वातावरण विकसित किया कि लोग उनके भक्त हो गए। जिस स्थान पर संत रूपी बाबा ने अपना डेरा लगाया वहां एक तालाब है। बाबा तालाब में स्नान करते और वहीं पूजा-अर्चना कर जो भी भिक्षा में मिलता, खा लेते। बाबा के रहते उक्त स्थल सत्संग, भजन, कीर्तन में तबदील हुआ। ग्रामीणों की भक्ति सेवा के चलते एक दिन बाबा ने अपना शरीर त्याग दिया। उनकी जेब से निकले संदेश में बताया गया कि यह तालाब चमत्कारी है और इसकी मिट्टी के लेप से गठिया बाय के रोगी रोगमुक्त हो जाएंगे। वहीं तालाब में स्नान करने से शरीर तो रोग मुक्त होगा ही, मन को भी शांति मिलेगी।

सोना अर्जुनपुर के लोगों को संत रूपी बाबा जिन्हें सिद्ध पुरुष माना गया है, जिनका मरणोपरान्त संदेश भगवान का संदेश लगा। लोगों ने चंदा एकत्र कर तालाब के बीचोबीच मिट्टी का तट बनाकर बाबा सिद्ध का मंदिर बना दिया। मंदिर की देखरेख के लिए गांव के लोगों की एक समिति भी बनाई गई तथा मंदिर का चढ़ावा लेने वालों का ठेका भी छोड़ा जाने लगा। 50 रुपये साल के ठेके से शुरू हुई यह ठेकेदारी अब लगभग 8 लाख 78 हजार रुपये प्रति साल है। यहाँ मंदिर का पुजारी होने के लिए कोई जातिबंधन नहीं है। वर्तमान में यह ठेका एक ब्राह्मण परिवार के पास है।

प्रत्येक वर्ष मई, जून और जुलाई के महीने में प्रत्येक शनिवार व रविवार को यहां मेला लगता है। दूर-दूर से अपनी कारों, बसों, ट्रैक्टर-ट्रालियों तथा रेलगाड़ी में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मंदिर पर मनौती का ध्वज फहराते हैं और मंदिर प्रांगण में भंडारा भी करते है। बाबा सिद्ध के केंद्रीय मंदिर के साथ-साथ यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर भी है तथा गणेश, दुर्गा, कृष्ण, हनुमान, गोरखनाथ व शनिदेव के सुंदर मंदिर दर्शनीय व वंदनीय हैं। मंदिर स्थल बहुत ही सुंदर एवं मन को मोह लेने वाला है। श्रद्धालुओं के लिए बिजली, पानी, भोजन इत्यादि सभी की उचित व्यवस्था है। किसी भी सुविधा के लिए कोई शुल्क नही लिया जाता। मंदिर परिसर में रुद्राक्ष के वृक्ष की शोभा देखते ही बनती है। मंदिर के तालाब का आधा हिस्सा श्रद्धालुओं के स्नान हेतु है तथा आधे हिस्से में कछुओं व मछलियों की भरमार है, जिन्हें श्रद्धालु बड़े प्यार से आटे की गोलियां बनाकर खिलाते हैं।

बाबा सिद्ध का कोई वास्तविक चित्र नहीं है। केवल उनकी प्रतिमा का चित्र मिलता है। बाबा सिद्ध के प्रति आस्था को लेकर सभी के नत्मस्तक होने से गांव के लोग भी खुश है, क्योंकि उनकी प्रगति में बाबा सिद्ध का बड़ा योगदान है। गाँव के सभी लोग बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में सदैव तत्पर रहते है एवं धर्मलाभ उठातें है।

🕉 🙏 "जय बाबा सिद्ध महाराज " 🙏🔯

संपर्क सूत्र: +91-9719947024 (प्रधान सुन्दर राजपूत)


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